ईश्वर ही एक मात्र आधार है

यदि सचमुच आनंद का लाभ जीवन में लेना है तो ईश्वर की प्राप्ति करना ही अभिधेय है संपूर्ण गीता में भगवान कृष्ण सिर्फ एक जगह कहते है कि मै कैसे मिलूंगा

अन्यन्य चेताः सतत यो माम स्मरति नित्यशः

तस्याहम सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः